गेहूं की पैदावार दोगुनी करने का राज: दूसरी सिंचाई + सही खाद प्रबंधन

गेहूं भारतीय किसान की मुख्य फसल है और इसकी पैदावार सीधे किसानों की आय से जुड़ी होती है। आजकल बीज की गुणवत्ता, मौसम और मिट्टी की उर्वरता के साथ-साथ सिंचाई और खाद प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो गया है। सही तकनीक अपनाने से गेहूं की पैदावार को दोगुना करना संभव है। इस लेख में हम आपको बताएंगे गेहूं की दूसरी सिंचाई और खाद प्रबंधन के असरदार तरीके, जिससे खेत में कल्लों की संख्या बढ़े और गुणवत्ता बेहतर हो।


1. गेहूं की दूसरी सिंचाई का महत्व

गेहूं की फसल में सिंचाई का समय और संख्या पैदावार को तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
विशेषकर दूसरी सिंचाई फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

पहली और दूसरी सिंचाई का अंतर:

टिप्स:


2. दूसरी सिंचाई से कल्लों की संख्या बढ़ाने का तरीका

दूसरी सिंचाई से कल्लों की संख्या बढ़ती है, जिससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन ज्यादा होता है। इसके लिए कुछ कारगर उपाय हैं:

  1. संतुलित जल प्रबंधन:

    • मिट्टी में नमी बनी रहे, लेकिन ज्यादा पानी न दे।

    • ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम इस्तेमाल करने से पानी की बचत होती है।

  2. सही समय पर सिंचाई:

    • कल्ला बनने से पहले सिंचाई सबसे प्रभावी होती है।

    • देर से सिंचाई करने पर पौधे कमजोर पड़ सकते हैं।

  3. फसल के विकास पर नजर:

    • अगर पौधों में पत्तियां पीली पड़ रही हैं या बढ़त धीमी है, तो पानी की कमी हो रही है।

    • दूसरी सिंचाई के साथ-साथ पौधों की स्थिति जांचना जरूरी है।


3. गेहूं में खाद प्रबंधन

गेहूं की पैदावार केवल पानी पर निर्भर नहीं होती, खाद (fertilizer) का संतुलित इस्तेमाल भी उतना ही जरूरी है।

मुख्य खाद और उनकी भूमिका:

खाद का प्रकार भूमिका प्रयोग का समय
यूरिया (Nitrogen) हरी पत्तियों और कल्लों की संख्या बढ़ाने में मदद पहली सिंचाई और दूसरी सिंचाई के समय
सुपर फॉस्फेट (Phosphorus) जड़ों को मजबूत बनाने और ऊर्जा संचयन बोआई के समय या पहली सिंचाई
पोटाश (Potash) रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और दाने की गुणवत्ता दूसरी सिंचाई के साथ
जिंक, बोरॉन जैसे सूक्ष्म तत्व पौधे के समग्र विकास और बीज गुणवत्ता नोडल स्तर पर या मिट्टी की जाँच के बाद

टिप्स:

  • नाइट्रोजन की आवश्यकता: दूसरी सिंचाई के समय 50–60% यूरिया डालना सबसे असरदार है।

  • सुपर फॉस्फेट और पोटाश: मिट्टी के परीक्षण के आधार पर ही डालें।

  • जैविक खाद: गोबर या कम्पोस्ट का इस्तेमाल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए जरूरी है।


4. दूसरी सिंचाई और खाद का संयोजन

दूसरी सिंचाई और खाद प्रबंधन को साथ में लागू करने से फसल की कल्ला संख्या और दाने का आकार बढ़ता है।

उदाहरण:

  • दूसरी सिंचाई से पौधों में नमी बनी रहती है।

  • यूरिया और पोटाश की सही मात्रा डालने से पौधे जल्दी बढ़ते हैं और ज्यादा कल्ले बनाते हैं।

  • परिणाम: प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन और बीज की गुणवत्ता बेहतर।


5. अतिरिक्त सुझाव

  1. बीज का चयन: उच्च उत्पादन देने वाले और रोग-प्रतिरोधी बीजों का इस्तेमाल करें।

  2. रोग और कीट नियंत्रण: पीले पत्ते, पाउडरी मिल्ड्यू और ब्लास्ट जैसी समस्याओं से बचाव के लिए समय-समय पर फफूंदनाशी का छिड़काव करें।

  3. मिट्टी परीक्षण: फसल की शुरुआत से पहले मिट्टी की जाँच कर लें, ताकि खाद का सही संतुलन बनाया जा सके।

  4. सिंचाई तकनीक: मिट्टी और जल संसाधन के अनुसार ड्रिप, स्प्रिंकलर या परंपरागत विधि अपनाएँ।

गेहूं की पैदावार दोगुनी करने का रहस्य सही समय पर दूसरी सिंचाई और संतुलित खाद प्रबंधन में छुपा है।

  • दूसरी सिंचाई से कल्लों की संख्या बढ़ती है।

  • यूरिया, पोटाश और फॉस्फेट का सही मिश्रण पौधों की वृद्धि और बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।

  • मिट्टी परीक्षण और रोग-नियंत्रण के साथ ये तकनीकें अपनाने से किसान अधिक लाभ और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

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