पिता से Property में हिस्सा लेने बेटा पहुँचा High Court, जज साहब ने बेटे को ही घर से निकाला – फैसला सुनकर चौंक गया पूरा परिवार

आज के समय में प्रॉपर्टी विवाद परिवारों को तोड़ने की सबसे बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला High Court में सामने आया, जहाँ एक बेटा अपने ही पिता से पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांगने अदालत पहुँचा, लेकिन फैसला ऐसा आया कि बेटे को ही घर खाली करना पड़ा

यह मामला न सिर्फ कानून की नजर में अहम है, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश देता है।

पूरा मामला क्या था?

मामला एक बुजुर्ग पिता और उनके वयस्क बेटे के बीच का है।
बेटे ने High Court में याचिका दायर कर कहा कि—

बेटे का दावा था कि वह जन्म से ही इस घर का मालिकाना हकदार है।

पिता ने कोर्ट में क्या दलील दी?

पिता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि—

पिता ने Senior Citizen Act का हवाला देते हुए सुरक्षा और घर खाली करवाने की मांग की।

High Court का बड़ा फैसला ⚖️

High Court ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बेहद सख्त और स्पष्ट फैसला सुनाया।

कोर्ट ने कहा—

“यदि संपत्ति पिता की स्वयं अर्जित है, तो बेटे का उस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता, जब तक पिता स्वयं न दें।”

इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि—

  • बेटा तुरंत घर खाली करे

  • पिता को शांतिपूर्ण जीवन जीने का अधिकार है

  • बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है

बेटे को क्यों निकाला गया घर से?

कोर्ट के अनुसार मुख्य वजहें थीं—

  • संपत्ति पैतृक नहीं, बल्कि Self-Acquired थी

  • बेटा आर्थिक रूप से सक्षम था

  • पिता की देखभाल की बजाय विवाद पैदा कर रहा था

  • Maintenance and Welfare of Parents Act लागू होता है

कानून क्या कहता है? (जानना बेहद जरूरी)

स्थिति कानूनी नियम
Self-Acquired Property पिता की मर्जी के बिना बेटा हकदार नहीं
बुजुर्ग माता-पिता उन्हें घर से निकालना या प्रताड़ित करना अपराध
पैतृक संपत्ति जन्म से अधिकार बनता है
कोर्ट का रुख बुजुर्गों के पक्ष में सख्त

समाज के लिए बड़ा संदेश 📢

यह फैसला साफ संकेत देता है कि—

  • माता-पिता की संपत्ति को अधिकार नहीं, सम्मान समझें

  • कोर्ट अब बुजुर्गों के अधिकारों को प्राथमिकता दे रही है

  • सिर्फ बेटा होने से हर संपत्ति पर दावा नहीं बनता

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया

फैसले के बाद सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं—

  • “ऐसे फैसले जरूरी हैं”

  • “बुजुर्गों को न्याय मिलना चाहिए”

  • “लालच रिश्तों को खत्म कर देता है”

निष्कर्ष

यह मामला उन सभी के लिए चेतावनी है जो माता-पिता को केवल संपत्ति का जरिया समझते हैं।
कानून अब साफ है—

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